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नागदा। उन्हेल थाना क्षेत्र में किन्नर के घर पर लूट व मारपीट की घटना हुई है। तीन अज्ञात बदमाश अचानक घर में घुस आए और डंडों से हमला कर घायल कर दिया। इसके बाद घर में रखे लाखों रूपए और गहने लेकर फरार हो गए।
घर किन्नर समुदाय की गुरू कविता का है। बताया जा रहा है कि घर में घुसे बदमाशों ने कविता और मिस्टी पर डंडे से वार कर उन्हें घायल कर दिया। जिसके बाद दोनों बेहोश हो गए। हमले में कविता को गंभीर चोटें आई हैं जिन्हें उपचार के लिए उज्जैन जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं। वहीं मिस्टी को मामूली चोटें आई हैं।
बदमाशों ने कविता और मिस्टी के बेहोश होने के बाद घर में लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया। बदमाशों ने घर में रखा 3 लाख 50 हजार रूपए नगद और गहनों पर हाथ साफ किए और वहां से फरार हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही उन्हेल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस आसपास लगे CCTV खंगाल रही है जिससे आरोपियों की पहचान हो सके। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश की जा रही है, जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर घटना का खुलासा किया जाएगा।

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भोपाल। ट्विशा शर्मा की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। हाई प्रोफाइल केस में अब केंद्रीय गृह मंत्रालय भी शामिल हो गया है। दरअसल, ट्विशा के पति समर्थ सिंह जमानत याचिका खारिज होने के बाद से पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। जिसके बाद पुलिस को आशंका है कि वह विदेश भाग गया है। वहीं सुसाइड केस में इस्तेमाल की गई बेल्ट की रिपोर्ट भी सामने आई है।
ट्विशा के पति समर्थ सिंह को सुसाइड केस में आरोपी बनाया गया है। उसने अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। डीसीपी जोन 2 ने पिछले दिनों उस पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित करते हुए लुक आउट नोटिस जारी किया था। पुलिस को उसके देश से बाहर भागने की आशंका है जिसके चलते लुक आउट नोटिस जारी हुआ है।
भोपाल पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की मिनिस्ट्री आफ इमीग्रेशन को पत्र लिखा है। भोपाल पुलिस ने समर्थ सिंह का पासपोर्ट रद्द करवाने के लिए पासपोर्ट कार्यालय के साथ कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस की 6 टीमें समर्थ की तलाशी में जुटी हुई हैं।
ट्विशा सुसाइड केस में इस्तेमाल की गई बेल्ट की रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि उसी बेल्ट से ट्विशा की मौत हुई है। लिगेचर रिपोर्ट में भी ट्विशा की मौत को आत्महत्या बताया गया। बता दें कि इससे पहले लिगेचर (फंदे का बेल्ट) के साथ पोस्टमार्टम नहीं हुआ था। दो दिन पहले पुलिस ने आत्महत्या में इस्तेमाल हुआ बेल्ट दिया था।
भोपाल एम्स की शॉर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बॉडी पर मल्टीपल चोटों के निशानों का जिक्र है। ट्विशा के परिजन शुरुआत से हत्या की आशंका जता रहे हैं। वहीं, ट्विशा की सास रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके वकील इनोश जॉर्ज कार्लो ने रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि रिपोर्ट केवल सेंसेशन फैलाने के इरादे से तैयार की गई है। रिपोर्ट में चोटों का जिक्र है, लेकिन कहां और कितनी चोट हैं, यह स्पष्ट नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सेकेंड पोस्टमॉर्टम या किसी भी एजेंसी से जांच कराने पर हमें कोई ऐतराज नहीं है। हम जांच में सहयोग करेंगे।
इस मामले में पुलिस जांच पर सवाल उठ रहे हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार जिस बेल्ट से फांसी लगाने की बात कही गई थी, उसे जांच अधिकारी पोस्टमॉर्टम के समय एम्स भोपाल नहीं ले गए थे। बाद में बेल्ट जांच के लिए सौंपी गई, लेकिन डॉक्टर कथित फांसी के साधन और गर्दन के निशानों का वैज्ञानिक परीक्षण नहीं कर सके।
पोस्टमॉर्टम में हुई चूक के बाद ट्विशा के परिजन ने मामले की जांच मध्य प्रदेश से बाहर किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने और दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग की है। इसी वजह से मौत के आठ दिन बाद भी परिजन बॉडी लेने और अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं हैं।
परिजन का कहना है कि बेल्ट उपलब्ध नहीं होने से डॉक्टर यह तय नहीं कर सके कि फांसी किस चीज से लगाई गई थी। गर्दन के मार्क्स का सही मिलान और माप भी नहीं हो पाया। इस बीच, पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी गई थी।
ट्विशा की सास और पूर्व जज ग‍िर‍िबाला ने उसे लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जब हम उसे देखने गए थे तब वह कहती थी कि मुझे पौधे बहुत पसंद थे। मुझे बच्चे बहुत पसंद हैं, मैं कम से कम 4 बच्चे करूंगी। लेकिन जब मैं वॉक कर सुबह आती थी तो वह कभी पौधों में पानी नहीं डालती थी। जब पुलिस ने हमें बंद किया था तब भी मुझे पौधे में पानी डालना होता था वरना वे मर जाते। एक तरफ पौधे अच्‍छे लगते हैं, लेक‍िन पौधों की देखरेख नहीं करनी। दूसरी तरफ बच्‍चे अच्‍छे लगते हैं, लेक‍िन बच्‍चे पैदा नहीं करना। खाना बनाना अच्‍छा लगता है, लेक‍िन वो भी नहीं।

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जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में अवैध उत्खनन (Illegal Mining) और खनिजों के अवैध परिवहन पर जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों पर भारी-भरकम जुर्माना ठोका है।
माइनिंग विभाग (Mining Department) द्वारा कलेक्टर न्यायालय में दर्ज कराए गए कुल 96 प्रकरणों पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया गया है। इन सभी मामलों को मिलाकर कुल 6 करोड़ रुपये की पेनाल्टी लगाई गई है। एक अकेले मामले में ₹40 लाख से ज्यादा की पेनाल्टी लगाई गई है। कार्रवाई की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ एक विशिष्ट प्रकरण में ही दोषियों पर 40 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है। यह बड़ी कार्रवाई अभिलाष तिवारी एवं अन्य के खिलाफ दर्ज मामलों में की गई है।
बता दें कि खनिज विभाग द्वारा अवैध उत्खनन और परिवहन का यह मुख्य मुकदमा साल 2022 में दर्ज करवाया गया था, जिस पर लंबे समय से कलेक्टर कोर्ट में सुनवाई चल रही थी।

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उज्जैन। काल भैरव क्षेत्र स्थित गढ़कालिका मंदिर में रविवार दोपहर 12 बजे आरती के दौरान विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। विवाद महामंडलेश्वर साध्वी श्री श्री 1008 काली नंद गिरी, किन्नर अखाड़ा तेलंगाना एवं मंदिर के पुजारी गार्ड के बीच हुआ। घटना के बाद मंदिर परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
दरअसल महामंडलेश्वर साध्वी दोपहर 12 बजे की आरती में शामिल होने मंदिर पहुंची थीं। आरोप है कि आरती के दौरान उन्हें वहां से हटाते हुए बाहर जाने के लिए कहा गया, जिससे वे आक्रोशित हो गई। इस दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि विरोध स्वरूप उन्होंने अपने ऊपर कार से पेट्रोल लाकर मंदिर परिसर में डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया। हालांकि मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल उन्हें रोक लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इस बीच मंदिर का एक गेट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया और दूसरे गेट से दर्शन करवाए गए।
घटना की सूचना मिलते ही जीवाजीगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। साध्वी को समझाइश देकर थाने ले जाया गया। वहीं मंदिर प्रभारी मूलचंद जाटवा का कहना है कि आरती के दौरान श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ थी। साध्वी से केवल इतना कहा गया था कि वे थोड़ा साइड में हो जाएं ताकि श्रद्धालु दर्शन कर आसानी से निकल सकें। इसी बात को लेकर वे नाराज हो गई और विवाद की स्थिति बन गई।
जीवाजीगंज थाना पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराई। समझाइश के बाद आपसी सहमति से विवाद समाप्त हुआ, जिसके बाद पुलिस ने दोनों को थाने से रवाना कर दिया। इस दौरान सीएसपी पुष्पा प्रजापति ने बताया कि दर्शन को लेकर हल्का विवाद हुआ था, लेकिन अब दोनों पक्षों के बीच आपसी राजीनामा हो गया है।

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भोपाल मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने देश में बढ़ते आर्थिक संकट और महंगाई को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भारत में मौजूदा आर्थिक संकट की बड़ी वजह मोदी सरकार में लीडरशिप क्राइसिस, दूरदर्शी सोच का अभाव और अक्षमता है।
दिग्विजय ने इसे मोदी सरकार द्वारा निर्मित संकट बताते हुए कहा कि इसका खामियाजा देश की जनता पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के बढ़ते दामों के रूप में भुगत रही है।
सोशल मीडिया पर शनिवार सुबह किए गए पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने लिखा कि देश की जनता को यह समझना होगा कि अंतरराष्ट्रीय ईंधन क्राइसिस के साथ-साथ भारत में आर्थिक संकट की वजह केंद्र सरकार की नीतियां भी हैं।
उन्होंने कहा कि डीजल के दाम बढ़ने से पूरे देश में महंगाई का असर पड़ता है, जिसका असर उद्योगों, किसानों और घरेलू बजट पर आता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पश्चिम एशिया युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि जब संकट शुरू हुआ तब देश को “सब चंगा सी” बताया गया और कांग्रेस के सवालों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए। दिग्विजय ने कहा कि अमेरिकी अनुमति के चलते भारत की संप्रभुता को गिरवी रखने जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार से दो सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा कि मार्च में रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री देश को ऐसी स्थिति में क्यों ले आए जहां भारत को अनुमति मांगनी पड़ रही है।
उन्होंने दूसरा सवाल पूछते हुए कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑइल के दाम कम थे, तब मोदी सरकार ने जनता को राहत देने के बजाय करों के जरिए 10 साल में ₹43 लाख करोड़ कमाए। अब जनता पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ क्यों डाला जा रहा है?