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भारतीय रेलवे अपने पूरे ब्रॉड गेज (BG) नेटवर्क के विद्युतीकरण का काम मिशन मोड में कर रहा है। रेल मंत्रालय ने बताया कि देश के ब्रॉड गेज (BG) नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत हिस्सा पहले ही विद्युतीकृत हो चुका है। BG लाइनों के कुल 70,271 रूट किलोमीटर (RKm) में से, 31 मई 2026 तक 70,002 RKm का विद्युतीकरण हो चुका है, और नेटवर्क का बहुत छोटा सा हिस्सा ही बाकी है।
भारत में रेलवे विद्युतीकरण 1925 में शुरू हुआ था, जब देश की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन, जो 1,500-वोल्ट DC सिस्टम पर चलती थी, महाराष्ट्र में बॉम्बे विक्टोरिया टर्मिनस और कुर्ला हार्बर के बीच चली थी। रेल मंत्रालय के ताज़ा अपडेट के अनुसार, 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने ब्रॉड गेज (BG) रेलवे नेटवर्क का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया है, और कोई भी रूट किलोमीटर बाकी नहीं है।
अभी भी सिर्फ़ पाँच राज्यों में कुछ हिस्सों का विद्युतीकरण होना बाकी है। इन बचे हुए हिस्सों की कुल लंबाई सिर्फ़ 269 RKm है। इनके अलावा, सभी नई लाइन और मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को विद्युतीकरण के साथ मंज़ूरी दी जा रही है और बनाया जा रहा है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, सिर्फ़ पाँच राज्यों – राजस्थान, तमिलनाडु, असम, कर्नाटक और गोवा – में ब्रॉड गेज (BG) रेलवे सेक्शन का विद्युतीकरण अभी बाकी है, जिनकी कुल लंबाई 269 रूट किलोमीटर (RKm) है।
राजस्थान में, राज्य के कुल 6,514 RKm BG नेटवर्क में से 6,504 RKm का विद्युतीकरण हो चुका है, और सिर्फ़ 10 RKm का काम बाकी है। इसी तरह, तमिलनाडु ने अपने 3,926 RKm BG नेटवर्क में से 3,858 RKm का विद्युतीकरण कर लिया है, और 68 RKm बाकी है। असम ने अपने 2,589 RKm ब्रॉड गेज नेटवर्क का 97.9 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया है, जबकि कर्नाटक ने अपने 3,743 RKm BG नेटवर्क का 96.8 प्रतिशत विद्युतीकरण किया है। गोवा में, कुल 187 RKm ब्रॉड गेज नेटवर्क में से 171 RKm का विद्युतीकरण हो चुका है, और केवल 16 RKm का काम बाकी है।

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फिरोजपुर। पंजाब के फिरोजपुर में फाजिल्का रोड पर शनिवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 15 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह भीषण दुर्घटना जंगा वाले मोड़ के पास एक पिकअप गाड़ी और घोड़ा ट्रॉला के बीच आमने-सामने की टक्कर के कारण हुई।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, पिकअप गाड़ी में सवार करीब 30 लोग अपने एक परिजन की अस्थियां विसर्जित करने के लिए सुबह 3:30 बजे घर से रवाना हुए थे। रास्ते में पेट्रोल डलवाने के बाद, जैसे ही उनका वाहन जनगांव वाला मोड़ के पास पहुंचा, सड़क के बीच खड़ी एक ट्रॉली से उनकी पिकअप की जोरदार टक्कर हो गई और गाड़ी पलट गई।
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू किया और घायलों को बाहर निकाला। इसके बाद एंबुलेंस की मदद से सभी को सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। कुछ लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था, जबकि अन्य घायलों का इलाज अस्पताल में शुरू किया गया।
सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. निखिल गुप्ता ने बताया कि कई मरीजों की स्थिति बेहद नाजुक थी, जिसके चलते उन्हें बेहतर इलाज के लिए गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया गया है। बाकी घायलों का उपचार स्थानीय सिविल अस्पताल में चल रहा है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाया और यातायात बहाल कराया। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और हताहतों की पहचान की जा रही है।

 

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जयपुर। कोरोना महामारी के बाद दुनिया अब भी नई स्वास्थ्य चुनौतियों को लेकर सतर्क है। इसी बीच राजस्थान से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जयपुर में युगांडा से आई एक युवती में इबोला वायरस जैसे लक्षण पाए गए हैं। हालांकि अभी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एहतियात के तौर पर उसे आइसोलेशन में रखा गया है और सैंपल जांच के लिए पुणे भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने तक पूरे स्वास्थ्य तंत्र को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
जानकारी के अनुसार, 19 वर्षीय युगांडा नागरिक युवती शुक्रवार सुबह एयर अरेबिया की फ्लाइट से शारजाह होते हुए जयपुर पहुंची थी। एयरपोर्ट पर नियमित स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग के दौरान उसमें कुछ ऐसे लक्षण दिखाई दिए जो इबोला संक्रमण से मिलते-जुलते हैं। युवती को तुरंत मेडिकल निगरानी में लिया गया और आगे की जांच के लिए राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) अस्पताल भेजा गया।
स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर युवती को RUHS अस्पताल के विशेष आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। अस्पताल प्रशासन ने उसे अन्य मरीजों से पूरी तरह अलग रखा है, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण के खतरे को रोका जा सके। अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है और सभी जरूरी मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है।
RUHS अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा कि, फिलहाल युवती में इबोला वायरस की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि मरीज में बुखार और सिरदर्द समेत कुछ ऐसे लक्षण पाए गए हैं जो इबोला संक्रमण से मिलते हैं, लेकिन केवल लक्षणों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। उन्होंने कहा कि, अंतिम पुष्टि लैब रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। फिलहाल मामले को केवल संदिग्ध मानकर जांच की जा रही है।
महिला के ब्लड और अन्य मेडिकल सैंपल जांच के लिए पुणे स्थित राष्ट्रीय स्तर की विशेष प्रयोगशाला भेजे गए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, रिपोर्ट 24 से 48 घंटे के भीतर आने की संभावना है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि युवती वास्तव में इबोला वायरस से संक्रमित है या नहीं।
राजस्थान में पहली बार इबोला का संदिग्ध मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट हो गया है। एयरपोर्ट, अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही युवती की ट्रैवल हिस्ट्री और उसके संपर्क में आए लोगों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
गौरतलब है कि 2 जून को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इबोला वायरस को लेकर एडवाइजरी जारी की थी। एडवाइजरी में कहा गया था कि, जो लोग पिछले 21 दिनों के भीतर इबोला प्रभावित देशों की यात्रा कर चुके हैं, उन्हें अपने स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति में बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त या असामान्य रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत खुद को अलग कर स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचना देनी चाहिए।
इबोला वायरस एक बेहद गंभीर और कई मामलों में जानलेवा वायरल बीमारी है। यह पहली बार साल 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। इस वायरस का नाम डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में बहने वाली इबोला नदी के नाम पर रखा गया था, जहां इसके शुरुआती मामले मिले थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है और कई मामलों में मरीज की मौत का कारण बनती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इबोला वायरस की मृत्यु दर 25 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक हो सकती है। मृत्यु दर वायरस के प्रकार, संक्रमण की गंभीरता और समय पर इलाज मिलने पर निर्भर करती है। जितनी जल्दी मरीज की पहचान और इलाज शुरू होता है, उसके बचने की संभावना उतनी अधिक रहती है।
भारत में अब तक इबोला वायरस संक्रमण का कोई पुष्ट मामला दर्ज नहीं हुआ है। यही वजह है कि, जयपुर में सामने आया यह संदिग्ध मामला स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञ लगातार यह दोहरा रहे हैं कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि अभी केवल लक्षण मिले हैं, संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है।
राजस्थान से पहले हैदराबाद एयरपोर्ट पर भी एक सूडानी नागरिक में इबोला जैसे लक्षण पाए जाने के बाद उसे निगरानी में रखा गया था। वहीं छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अफ्रीकी देशों से लौटे तीन लोगों को एहतियातन 21 दिन के लिए होम आइसोलेशन में रखा गया है। हालांकि इनमें किसी भी प्रकार के लक्षण नहीं मिले हैं।

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भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता को नई मजबूती देने वाला नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट (NGC) प्रोजेक्ट जल्द ही अंतिम चरण में पहुंच सकता है। करीब 40,000 करोड़ रुपये की इस रणनीतिक परियोजना को अब केवल कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद नौसेना को आठ अत्याधुनिक युद्धपोतों का बेड़ा हासिल होगा, जो हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सैन्य उपस्थिति को और सशक्त बनाएंगे।
सूत्रों के अनुसार, सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) सबसे कम बोलीदाता (L1) के रूप में उभरी है और उसे पांच कॉर्वेट के निर्माण का ठेका मिल सकता है। शेष तीन युद्धपोतों का निर्माण Goa Shipyard Limited (GSL) द्वारा किए जाने की संभावना है।
करीब 3,500 टन विस्थापन वाले इन युद्धपोतों को “डिस्ट्रिब्यूटेड लेथैलिटी” अवधारणा पर विकसित किया जा रहा है। यानी आकार में अपेक्षाकृत छोटे होने के बावजूद ये जहाज लंबी दूरी तक सटीक और घातक हमला करने में सक्षम होंगे। इनकी अधिकतम गति 32 नॉट्स होगी और ये बिना बाहरी सहायता के लगभग 30 दिनों तक समुद्र में लगातार तैनात रह सकेंगे।
NGC की सबसे बड़ी ताकत इसकी उन्नत हथियार प्रणाली होगी। प्रत्येक कॉर्वेट पर 8 एक्सटेंडेड-रेंज ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें तैनात की जाएंगी, जो लंबी दूरी पर सटीक निशाना साधने में सक्षम हैं।
हवाई खतरों से सुरक्षा के लिए जहाजों में 16 से 32 वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (VLS-SR SAM) सेल लगाए जाएंगे। इसके अलावा AK-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम मिसाइलों, ड्रोन और लड़ाकू विमानों जैसे नजदीकी खतरों को निष्क्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इन युद्धपोतों को उन्नत पनडुब्बी-रोधी (ASW) क्षमताओं से लैस किया जाएगा। इनमें हल-माउंटेड सोनार, एक्टिव टोव्ड ऐरे सोनार और ट्रिपल-ट्यूब टॉरपीडो लॉन्चर लगाए जाएंगे, जिससे समुद्र के भीतर छिपे दुश्मन की पहचान और उस पर हमला करना आसान होगा।
साथ ही, ये युद्धपोत HAL Dhruv और Sea King जैसे मल्टी-रोल हेलीकॉप्टरों का संचालन भी कर सकेंगे, जिससे उनकी निगरानी और पनडुब्बी-रोधी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
नई पीढ़ी के इन कॉर्वेट्स में ELM-2248 MF-STAR AESA रडार, VARUNA ESM, SHAKTI इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और उन्नत लक्ष्य-ट्रैकिंग तकनीक शामिल होगी। ये प्रणालियां युद्ध के दौरान दुश्मन की मिसाइलों, रडार और इलेक्ट्रॉनिक हमलों का मुकाबला करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
क्या है संभावित टाइमलाइन?
यदि CCS से 2026 में मंजूरी मिल जाती है, तो उसी वर्ष GRSE और GSL के साथ निर्माण अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। इसके बाद 2027 में विस्तृत डिजाइन और स्टील कटिंग के साथ निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
योजना के अनुसार, पहला कॉर्वेट 2028-29 तक लॉन्च किया जा सकता है और 2031-32 तक भारतीय नौसेना में शामिल हो सकता है। बाकी सात युद्धपोत 2032 से 2036 के बीच चरणबद्ध तरीके से नौसेना को सौंपे जा सकते हैं।
ब्रह्मोस मिसाइलों, उन्नत एयर डिफेंस, आधुनिक सेंसर और शक्तिशाली पनडुब्बी-रोधी क्षमताओं से लैस नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इनके शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा, निगरानी क्षमता और रणनीतिक प्रभाव पहले से कहीं अधिक मजबूत होगा।

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कॉकरोच जनता पार्टी में शामिल होने के लिए कई ऐसे राजनेता है जो अपनी इच्छा बता चुके चुके है, पर अभी तक से यही लग रहा है कि सिर्फ इस पार्टी का मकसद केवल सोशल मीडिया पर ट्रेंड में आकर सिर्फ अटेन्शन पाना था. लेकिन अब लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करनेवाले भारतीय ऐक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने इसमे शामिल होने की इच्छा जताई है. सोनम वांगचुक ने ऐलान किया है कि अगर शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान 5 जून तक इस्तीफा नहीं देते है तो कॉकरोच जनता पार्टी के साथ खड़े होंगे.
उन्होंने ने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर हम नहीं तो कौन? अभी नहीं तो कब? अगर 5 जून तक हालात नहीं सुधरते है तो 6 जून को कॉकरोच जनता पार्टी को सपोर्ट करेंगे.
भारतीय ऐक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की मांगों और विचारधारा का समर्थन किया है। सोनवांगचुक ने आगे कहा है कि मुझे कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके से बात करके ऐसा लगा कि उनकी सोच गलत नहीं है, वह अच्छे मंशा के साथ एक देशप्रेमी की तरह देश में बदलाव चाहते है.
भारतीय ऐक्टिविस्ट ने आगे कहा कि अभिजीत 6 जून को दिल्ली में लोगों को बुला रहे हैं, अगर 5 जून तक शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते है तो मैं भी जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन में शामिल होऊंगा. NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त गंभीर समस्याओं को भी उन्होंने अपनी मांगों में जोड़ा है.
बताते चले कि कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके अमेरिका से भारत आएंगे. उसके बाद वे एयरपोर्ट से सीधे पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे और प्रदर्शन की इजाजत मांगेंगे. अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर बताया था कि वे 1 जून को जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करेंगे. कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर X अकाउंट पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं.