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भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने सोशल मीडिया पर वायरल हुई शिकायतों के बाद बड़ा एक्शन लेते हुए नेस्ले इंडिया, KFC, फ्लिपकार्ट इंडिया और ओपन सीक्रेट जैसी कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सबसे गंभीर मामला नेस्ले के लोकप्रिय ब्रांड मैगी से जुड़ा है, जिसमें एक उपभोक्ता ने पैकेट के अंदर जिंदा कीड़े (लार्वा) मिलने का दावा किया था। FSSAI ने इस शिकायत को गंभीर मानते हुए नेस्ले इंडिया से तुरंत विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। वहीं KFC को साफ-सफाई और हाइजीन से जुड़े मामलों पर नोटिस भेजा गया है। इसके अलावा फ्लिपकार्ट इंडिया और ओपन सीक्रेट को खजूर आधारित प्रोडक्ट में कीड़े मिलने की शिकायत पर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
नेस्ले से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
FSSAI ने नेस्ले इंडिया से तीन बिंदुओं पर मांगी जानकारी
1. कच्चे माल और क्वालिटी चेक की जानकारी
कंपनी को यह बताना होगा कि जिस बैच में शिकायत मिली, उसका कच्चा माल किस सप्लायर से आया था। साथ ही पैकेट बाजार में भेजने से पहले कंपनी ने कौन-कौन से क्वालिटी टेस्ट किए थे उनके रिकॉर्ड भी जमा करने होंगे।
2. बाजार से प्रभावित स्टॉक हटाने के निर्देश
FSSAI ने पूछा है कि कंपनी ने शिकायत वाले बैच को सप्लाई चेन और बाजार से हटाने के लिए क्या कदम उठाए हैं ताकि संभावित रूप से प्रभावित प्रोडक्ट ग्राहकों तक न पहुंचे।
3. भविष्य के लिए नई सुरक्षा व्यवस्था
रेगुलेटर ने यह भी पूछा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कंपनी अपने क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम में क्या बदलाव करने जा रही है।
मैगी नेस्ले इंडिया का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा बिकने वाला ब्रांड है। ऐसे में यह मामला कंपनी की साख के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। साल 2015 में भी मैगी विवादों में आई थी, जब FSSAI ने लेड (सीसा) की अधिक मात्रा और MSG लेबलिंग विवाद के चलते देशभर से मैगी वापस मंगाने का आदेश दिया था। उस विवाद के बाद कंपनी को बिक्री और भरोसे दोनों में भारी नुकसान झेलना पड़ा था। अब सोशल मीडिया पर वायरल शिकायत के बाद आया यह नया नोटिस कंपनी के लिए फिर चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
FSSAI ने KFC को आउटलेट्स में साफ-सफाई और हाइजीन से जुड़े मामलों पर नोटिस भेजा है। वहीं ओपन सीक्रेट और फ्लिपकार्ट इंडिया को खजूर आधारित एक प्रोडक्ट में कीड़े मिलने की शिकायत पर जवाब देने के लिए कहा गया है। रेगुलेटर अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही शिकायतों को भी गंभीरता से लेते हुए सीधे जांच और कार्रवाई कर रहा है।
इन मामलों ने यह साफ कर दिया है कि अब सोशल मीडिया पर की गई एक शिकायत भी कंपनियों के लिए बड़ा संकट बन सकती है। पहले उपभोक्ता शिकायतों और आधिकारिक कार्रवाई के बीच लंबा समय लगता था लेकिन अब वायरल पोस्ट सीधे रेगुलेटरी नोटिस में बदल रही हैं। इससे फूड कंपनियों और क्विक सर्विस ब्रांड्स के लिए ऑपरेशनल और प्रतिष्ठा से जुड़ा जोखिम तेजी से बढ़ गया है।

भोपाल। अपने बयानों और किताबों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी नियाज खान ने देश की बढ़ती जनसंख्या को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने देश में बढ़ती आबादी को ‘नासूर’ बताते हुए कड़ाई से जबरन नसबंदी (Sterilization) लागू करने की वकालत की है।
पूर्व आईएएस नियाज खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर अपनी बात रखते हुए लिखा कि देश की बढ़ती जनसंख्या अब एक गंभीर संकट बन चुकी है। उन्होंने पोस्ट में लिखा- देश की डेढ़ अरब आबादी नासूर बन गई है। अब समय आ गया है कि लोगों की जबरदस्ती नसबंदी करने पर विचार किया जाए। लोग या तो खुद आगे आकर नसबंदी कराएं, या फिर सरकार को इसके लिए जबरिया (forcefully) कदम उठाने चाहिए। अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो देश का भविष्य अंधकारमय है।
नियाज खान ने जनसंख्या नियंत्रण के दायरे में मुस्लिम समुदाय को विशेष रूप से शामिल करने की बात कही है। उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि मुस्लिम परिवारों में बच्चों की संख्या ज्यादा होती है, इसलिए कड़ाई के साथ उनकी भी नसबंदी की जानी चाहिए। उनका मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण का यह नियम बिना किसी भेदभाव के सभी पर सख्ती से लागू होना चाहिए।
पूर्व प्रशासनिक अधिकारी के इस बेहद कड़े और संवेदनशील बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल तेज हो गई है। बढ़ती आबादी और ‘जबरन नसबंदी’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर इंटरनेट पर लोग दो पक्षों में बंट गए हैं और इस पर तीखी बहस शुरू हो गई है।
देश की डेढ़ अरब आबादी नासूर बन गई है। अब समय आ गया है कि लोगों की जबरदस्ती नसबंदी करने पर विचार किया जाय। या लोग खुद नसबंदी कराएं या सरकार जबरिया नसबंदी करे। मुस्लिम के यहां ज्यादा बच्चे होते हैं इसलिए कड़ाई से उनकी भी नसबंदी हो। अगर हम यह नहीं करते तो भविष्य अंधकारमय है।

लंबे समय से विवादों और शिकायतों के केंद्र में रहे सिंगरौली के उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार को आखिरकार मध्यप्रदेश शासन ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, मध्यप्रदेश भोपाल द्वारा 11 जून 2026 को जारी आदेश में विभागीय जांच में आरोप सिद्ध पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।
जानकारी के अनुसार अशोक सिंह परिहार के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई गई थी कि शासकीय सेवा में रहते हुए उनकी तीसरी संतान का जन्म निर्धारित कटऑफ तिथि के बाद हुआ है। मामले की विभागीय जांच कराई गई, जिसमें कलेक्टर सिंगरौली द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में उनके तीन संतान होने की पुष्टि हुई। जांच में यह भी सामने आया कि उनकी तीसरी संतान का जन्म वर्ष 2003 में हुआ था।
विभागीय जांच अधिकारी ने आरोप को प्रमाणित माना, जिसके बाद शासन ने सख्त कदम उठाते हुए उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दीं। मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के अनुसार 26 जनवरी 2001 के बाद तीसरी संतान होने पर शासकीय सेवा के लिए अपात्रता का प्रावधान है। इसी आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
अशोक सिंह परिहार का नाम इससे पहले भी विवादों में रहा है। उन पर एक करोड़ दस लाख रुपये से अधिक के कथित स्टाम्प घोटाले के मामले में निलंबन की कार्रवाई हो चुकी थी। हालांकि बाद में उनकी पुनः पदस्थापना सिंगरौली में ही कर दी गई थी, जिस पर भी सवाल उठे थे। जिले में लंबे समय से उनके कार्यकाल को लेकर शिकायतें और असंतोष की चर्चा होती रही है।
बर्खास्तगी के बाद पंजीयन विभाग सहित प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि शासन की यह कार्रवाई सेवा नियमों के उल्लंघन के मामलों में सख्त संदेश देने वाली है। वहीं जिले में यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है कि वर्षों तक चले विवादों और शिकायतों के बाद आखिरकार प्रशासन ने निर्णायक कदम उठाया है।

चचेरे भाई ने नाबालिक बहन से किया बलात्कार, ठहरा 4 माह का गर्भ, पुलिस ने किया आरोपी गिरफ्तार
गुना । गुना जिले के बमौरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम साजरवाड़ा में भाई-बहन के पवित्र रिश्तों को तार-तार करने वाली एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक 15 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ उसके ही सगे ताऊ के लडक़े (चचेरे भाई) ने पिछले 6 महीनों से लगातार डरा-धमकाकर दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। इस घिनौनी करतूत के कारण नाबालिग बालिका चार महीने की गर्भवती हो गई।
इस मामले की जानकारी पीडि़ता की मां और परिजनों को लगी तो परिजनों ने तुरंत पुलिस की शरण ली, जिसके बाद हरकत में आई बमौरी थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी को महज 10 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया।
वहीं, पीडि़ता की मानसिक और शारीरिक स्थिति को देखते हुए परिजनों ने जिला एवं सत्र न्यायालय के पॉस्को कोर्ट में गर्भपात (अबॉर्शन) की अनुमति के लिए आवेदन लगाया था। गत दिवस इस संबंध में एडीजे द्वारा सीएमएचओ को पत्र लिखकर आदेश दिया। जिसके बाद पीडि़़ता को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका सुरक्षित गर्भपात के लिए उपचार जारी है।
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम साजरवाड़ा में रहने वाले आरोपी परसराम भील ने अपने ही सगे चाचा की नाबालिग बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाया। आरोपी पिछले 6 महीने से बालिका को डरा-धमकाकर उसके साथ गलत काम कर रहा था। लोक-लाज और आरोपी के खौफ के कारण पीड़िता चुप रही, लेकिन जब उसे चार महीने का गर्भ ठहर गया, तो उसकी शारीरिक स्थिति बदलने लगी। बेटी की गिरती सेहत को देखकर जब मां ने कड़ाई से पूछताछ की तो उसने अपने सगे भाई की इस खौफनाक दरिंदगी की पूरी दास्तान बयां की। इसके बाद मां अपनी बेटी को लेकर सीधे बमौरी थाने पहुंची और आरोपी के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता की रिपोर्ट पर आरोपी परसराम भील के विरुद्ध बीएनएस की धारा 64(1), 64(2)(एफ), 351(2) एवं पॉक्सो एक्ट की धारा 5(एन), 5(1), 6, 3, 4 के तहत गंभीर धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज कर तत्काल विवेचना प्रारंभ की।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी हितिका वासल ने गंभीरता से लिया और आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी के कड़े निर्देश दिए। बमौरी थाना प्रभारी निरीक्षक दिलीप राजौरिया ने रिपोर्ट दर्ज होने के मात्र 10 घंटे के भीतर ही आरोपी परसराम (26) पुत्र रमेश भील को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और आरोपी को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
इनका कहना है
- गंभीर घटना में मुख्य आरोपी पीड़िता का ताऊ का लडक़ा ही है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज होने के 10 घंटे के भीतर ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
- हितिका वासल, एसपी गुना
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महिला चिकित्सक से मंगलसूत्र लूट का खुलासा, आरोपी एवं महिला आरोपिया गिरफ्तार
गुना। गुना कोतवाली प्रभारी निरीक्षक राजकुमार शर्मा और उनकी टीम द्वारा शहर के महावीरपुरा क्षेत्र में महिला चिकित्सक से मंगलसूत्र लूट प्रकरण का सफल खुलासा करते हुए प्रकरण में एक आरोपी एवं एक महिला आरोपिया को गिरफ्तार कर लूटा गया मंगलसूत्र तथा घटना में प्रयुक्त एक मोटरसाइकिल बरामद करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की गई है ।
उल्लेखनीय है कि दिनांक 09 जून 2026 को फरियादिया डॉ. रश्मि दीक्षित उम्र 47 वर्ष निवासी महावीरपुरा गुना के द्वारा गुना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि दिनांक 08 जून 2026 को रात्रि में खाना खाने के बाद वह अपने घर के बाहर ए.बी. रोड पर टहल रही थीं । इसी दौरान दो मोटरसाइकिलों पर सवार चार अज्ञात बदमाश उसके गले से सोने का मंगलसूत्र छीनकर फरार हो गए । उक्त रिपोर्ट पर से गुना कोतवाली में अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 287/26 धारा 304(2) बीएनएस के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई ।
पुलिस के तकनीकी विश्लेषण के आधार पर 11 जून 2026 को एक संदेही शिवप्रताप उर्फ सीटी पुत्र विक्रम पारदी उम्र 19 वर्ष निवासी ग्राम बीलाखेड़ी थाना धरनावदा, हाल हड्डीमील गुना को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई ।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर उक्त लूट की वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया । आरोपी ने बताया कि घटना की रात वे चारों दो मोटरसाइकिलों से कुसमौदा क्षेत्र से जयस्तंभ चौराहे की ओर आ रहे थे । इसी दौरान वंदना स्कूल के समीप एक महिला को टहलते हुए देखा, जिसके गले में सोने का मंगलसूत्र था । इसके बाद वह योजनाबद्ध तरीके से महिला का मंगलसूत्र छीनकर फरार हो गए । घटना के पश्चात चारों आरोपियों ने मंगलसूत्र को आपस में बांट लिया था । आरोपी शिवप्रताप पारदी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त पल्सर मोटरसाइकिल जप्त की गई तथा उसे विधिवत गिरफ्तार किया गया ।
विवेचना के दौरान प्रकरण में धारा 309(4) बीएनएस का इजाफा किया गया । अनुसंधान के दौरान आरोपी द्वारा अपने हिस्से में आए मंगलसूत्र के मोती एवं चेन को बेचने हेतु जौरा बाई पारदी को देने की जानकारी प्राप्त हुई । इसके बाद पुलिस द्वारा 12 जून 2026 को जौरा बाई पत्नि आकाश पारदी निवासी पटेलनगर कैंट को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसकी निशानदेही पर लूटा गया मंगलसूत्र, जिसमें 14 सोने के मोती एवं मंगलसूत्र की चेन के दो टुकड़े, कुल अनुमानित कीमत लगभग एक लाख रुपये, बरामद किए जाकर महिला आरोपिया जौराबाई को भी प्रकरण में विधिवत गिरफ्तार किया गया । पुलिस द्वारा प्रकरण में शामिल फरार अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है तथा उनकी गिरफ्तारी हेतु पुलिस टीम द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और जिन्हें भी शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा ।
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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर गुना शहर में चलाया गया अभियान
मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशन में एवं प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गुना अमिताभ मिश्र के मार्गदर्शन में 12.06.2026 को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर श्रम विभाग के अंतर्गत गठित बाल श्रमिक जिला टास्क फॉर्स समिति, गुना के संयुक्त तत्वाधान में बाल श्रम के उन्मूलन और बच्चों के अधिकारों के प्रति समाज को जागरूक करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया गया।
इस अभियान के अंतर्गत श्रीमती वंदना त्रिपाठी, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सर्वेश चतुर्वेदी, जिला विधिक सहायता अधिकारी एवं श्रमपदाधिकारी आशीष तिवारी, बाल श्रमिक जिला टास्क फॉर्स समिति के सदस्यों द्वारा गुना शहर का भ्रमण किया।
श्रीमती वंदना त्रिपाठी, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शहर का भ्रमण करते हुये दुकानदारों, दुकान पर काम करते नाबालिग बच्चों, चौराहा बस स्टेंड पर स्थित आमजन को संदेश दिया गया कि बच्चों का असली स्थान कारखानों या दुकानों में नहीं, बल्कि स्कूलों में है इसका स्थायी समाधान शिक्षा ही है बाल श्रम किसी भी सभ्य समाज के माथे पर कलंक है। हर बच्चे को शिक्षा और सुरक्षित बचपन पाने का अधिकार है। जब तक हम हर बच्चे को स्कूल नहीं पहुँचाते, तब तक देश के उज्ज्वल भविष्य की कल्पना अधूरी है। बाल श्रम को सिर्फ कानून के भरोसे नहीं रोका जा सकता, इसके लिए सामाजिक चेतना और जनता की भागीदारी जरूरी है। यदि आप कहीं भी किसी बच्चे को मजदूरी करते देखें, तो तुरंत इसकी सूचना हेल्पलाइन नंबर 1098 पर दें। इस अभियान के अतर्गत बाल श्रमिक जिला टास्क फॉर्स समिति, गुना द्वारा शहर में स्थित दुकानों से चार बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराने हेतु कार्यवाही की गयी।

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