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नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बुधवार को सुझाव दिया कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों को उन स्मार्टफोन और टैबलेट पर कुछ फंक्शन को दूर से ही सीमित करने या बंद करने की अनुमति दी जाए, जिन्हें डिवाइस फाइनेंसिंग लोन लेकर खरीदा गया था, ऐसा तब किया जाएगा जब लोन लेने वाले लोग लोन की किस्तें चुकाने में पीछे रह जाएँ।
यह प्रस्ताव भारत के बहुत बड़े मोबाइल बाज़ार के संदर्भ में आया है। 1.16 अरब से ज़्यादा मोबाइल कनेक्शन के साथ, भारत दुनिया के सबसे बड़े स्मार्टफ़ोन बाज़ारों में से एक है। होम क्रेडिट फ़ाइनेंस के 2024 के एक अध्ययन में पाया गया कि भारत में उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स की एक-तिहाई से ज़्यादा खरीद, जिसमें मोबाइल फ़ोन भी शामिल हैं, छोटे लोन के ज़रिए फ़ाइनेंस की जाती हैं।
प्रस्तावित नियम के तहत, लोन देने वाली कंपनियों को डिवाइस के फ़ंक्शन तभी सीमित करने की अनुमति होगी, जब लोन 90 दिनों से ज़्यादा समय से बकाया हो, और केवल तभी जब लोन लेने वाले ने लोन एग्रीमेंट पर साइन करते समय ऐसी पाबंदियों के लिए सहमति दी हो।
कोई भी पाबंदी लगाने से पहले, लोन लेने वालों को पेमेंट न करने के 60 दिनों के बाद एक नोटिस मिलना ज़रूरी है, जिसमें उन्हें बकाया चुकाने के लिए 21 दिन का समय दिया जाएगा। इसके बाद एक दूसरा नोटिस भी भेजा जाना ज़रूरी है, जिसमें पेमेंट के लिए कम से कम एक और हफ़्ता दिया जाए, और उसके बाद ही डिवाइस पर कोई कार्रवाई की जा सकती है।
RBI ने साफ़ कर दिया है कि ज़रूरी सेवाएँ हर समय उपलब्ध रहनी चाहिए, भले ही डिवाइस पर पाबंदी लगी हो। इंटरनेट का इस्तेमाल, आने वाली कॉल, इमरजेंसी SOS फ़ीचर और सरकारी अलर्ट किसी भी हाल में ब्लॉक नहीं किए जा सकते। इसके अलावा, लोन देने वाली कंपनियों को लॉक किए गए डिवाइस में मौजूद किसी भी निजी डेटा को देखने की मनाही होगी, जिससे निजता और डेटा सुरक्षा से जुड़ी चिंताएँ दूर होंगी।
जैसे ही कोई लोन लेने वाला अपना बकाया चुका देता है, लोन देने वाली कंपनियों को पेमेंट मिलने के एक घंटे के अंदर सभी पाबंदियाँ हटाना ज़रूरी है। ऐसा न करने पर, लोन देने वाली कंपनी को लोन लेने वाले को हर घंटे की देरी के लिए 250 रुपये का मुआवज़ा देना होगा। यह प्रस्ताव फ़रवरी में जारी एक पिछले ड्राफ़्ट पर मिली इंडस्ट्री की राय के बाद आया है, जिसमें लोन वसूली करने वाले एजेंटों से जुड़े नियमों को और सख़्त करने की बात कही गई थी. इस प्रस्ताव पर 31 मई तक आम लोगों की राय ली जाएगी।

इंदौर। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित ब्लैकमेलिंग के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों के नाम और जोड़े हैं। जिसमें रिशु चौधरी और पुलिसकर्मी विनोद शर्मा को आरोपी बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि विनोद चौधरी मुख्य आरोपी अलका दीक्षित के संपर्क में बना हुआ था और इस ब्लैकमेलिंग अभियान को मिशन के तौर पर संचालित किया जा रहा था। फिलहाल इसमें संभावना व्यक्त की गई की और भी आरोपी सामने आ सकते हैं। अभी तक सात लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है। जिनकी 25 में तक पुलिस रिमांड ली गई है।
डीसीपी राजेश त्रिपाठी के मुताबिक प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े हुए हितेंन ठाकुर ने ब्लैकमेलिंग सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज करवाया था। तभी से क्राइम ब्रांच लगातार जांच पड़ताल में जुटी थी। जिसमें अलका दीक्षित और उसके बेटे जयदीप दीक्षित को गिरफ्तार किया गया था। जांच पड़ताल के दौरान उज्जैन में रहने वाले जितेंद्र पुरोहित को भी पकड़ा गया था।
साथ ही इस ब्लैकमेलिंग में कारोबार को पार्टनरशिप के रूप में बताया गया था और पीथमपुर के रहने वाले लखन सिंह नामक व्यक्ति से अलका चौधरी ने फरियादी ठाकुर की मुलाकात करवाई थी। लेकिन इन सब के मंसूबों को लेकर फरियादी को किसी वारदात की बदबू आने लगी। इसके बाद उसने तुरंत क्राइम ब्रांच में शिकायत की।
शिकायत के बाद क्राइम ब्रांच ने मामले में जांच पड़ताल शुरू की जिसमें एक करोड रुपए की ब्लैकमेलिंग की बात सामने आई। इस आधार पर शिकायत भी दर्ज हुई थी। मामले में पुलिस ने 5 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था जो सागर के रहने वाली रिशु चौधरी और पुलिसकर्मी विनोद शर्मा संपर्क में थे।
मामले का खुलासा होने के बाद अब उन्हें भी आरोपी बना दिया गया है। इस मामले में अभी तक कुल सात आरोपी बन बन चुके हैं। पुलिस के मुताबिक पुलिसकर्मी विनोद लगातार अलका दीक्षित के संपर्क में था। वह पूरी प्लानिंग को मिशन के तौर पर संचालित कर रहा था ताकि ब्लैकमेलिंग से मिलने वाले रुपए का हिस्सा कर सभी आपस में बांट लेते। पुलिस के मुताबिक अभी और भी आरोपी बनने की संभावना है। उनके मोबाइल फोन की जांच पड़ताल की जा रही है।

सीधी। जिला अस्पताल से सोनोग्राफी मशीन चोरी का मामला प्रकाश में आया है। चोरी करने का आरोप सेवानिवृत्त शिशु रोग विशेषज्ञ पर लगाया गया है। जिसकी शिकायत सिविल सर्जन ने सिटी कोतवाली में दर्ज कराया है। पुलिस जांच में जुटी है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
सिविल सर्जन डॉ. एसबी खरे ने बताया कि जिला अस्पताल के कक्ष क्रमांक 12 में सोनोग्राफी रखी लगी हुई थी। 21 मई दोपहर करीब 2.30 से 3 बजे के बीच डॉ. देवेंद्र सिंह सेवानिवृत्त शिशु रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल बिना सूचना के अस्पताल पहुंचे। जहां उन्होंने महेश केवट वार्ड बॉय से ताला खोलने को कहा। कहने पर वार्ड बॉय ने ताला खोल दिया। इसके बाद डॉक्टर देवेंद्र सिंह कक्ष क्रमांक 12 में रखें सोनोग्राफी मशीन सहित अन्य सामग्री को लेकर चले गए।
उन्होंने यह भी शिकायत किया है कि राम सुजान मिश्रा सुरक्षा गार्ड द्वारा मशीन ले जाने से नहीं रोका गया है। ऐसे में देवेंद्र सिंह के साथ इन दोनों पर एफआईआर दर्ज किया जाए।
सेवानिवृत डॉक्टर देवेंद्र सिंह ने दावा किया है कि सोनोग्राफी मशीन के साथ यहां रखी अन्य मशीन मेरे खुद के पैसे से खरीदी गई थी। इसलिए हम जिला अस्पताल से लेकर आए हैं।
डॉ एसबी खरे सिविल सर्जन के शिकायत के बाद अभिषेक उपाध्याय सिटी कोतवाली प्रभारी ने दोनों ही पक्ष से रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा है। लेकिन अब तक दोनों पक्ष मशीन संबंधित बिल एवं अन्य कागजात लेकर प्रस्तुत नहीं हुए हैं। उपाध्याय ने कहा कि यदि दोनों पक्ष प्रस्तुत नहीं होंगे तो नोटिस जारी किया जाएगा।
सेवानिवृत डॉ देवेंद्र सिंह जिला अस्पताल के कक्ष क्रमांक 12 में रखे सोनोग्राफी मशीन बिना जानकारी लेकर चले गए हैं। जिसकी शिकायत सिटी कोतवाली में दर्ज कराई गई है।- डॉ. एसबी खरे सिविल सर्जन जिला अस्पताल सीधी

गुना।  गुना शहर के कैंट थाना क्षेत्र अंतर्गत एक बड़ी होटल के पीछे बनी एक कॉलोनी में आधी रात को डकैतों ने हथियारों से लैस होकर एक घर में धावा बोला और बुजुर्ग संपत्ति को बंधक बनाकर वहां से करीब चार लाख रुपए के सोने चांदी के जेवर सहित नगदी लेकर बदमाश फरार हो गए। 
मिली जानकारी के अनुसार, गुना के राजविलास होटल के पास एम-3 टाउन कॉलोनी में हुई एक बड़ी सनसनीखेज डकैती की घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। देर रात करीब 2 से 3 बजे के बीच 05 बदमाशों ने एक घर में घुसकर परिवार को धमकाते हुए लाखों के जेवर और नगदी लूट ली।
पीडित बुजुर्ग महिला के अनुसार, बदमाशों ने सबसे पहले घर के एक कमरे का ताला तोड़ा और भीतर घुसे। इसके बाद वे उस कमरे में पहुंचे जहां महिला और उनका पति आराम कर रहे थे। चोरों ने महिला को धमकाते हुए कहा, “चुप हो जाओ, नहीं तो जान से मार देंगे।" बदमाशों ने महिला के कानों से टॉप्स तक निकाल लिए। इस दौरान डेढ़ तोले की सोने की चेन, एक तोले की तीन सोने की अंगूठियां, 5 ग्राम के कानों के टॉप्स करीब 50 हजार रुपए नगद व सामान लेकर बदमाश फरार हो गए। 
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके।
गुना में हो रही लगातार रात्रि में वारदातों के चलते गुना पुलिस की रात्रि गश्त पर जनता सवाल उठने लगी है कि आखिर पुलिस रात में गश्त कहां करती है? जब आये दिन चोरी और डकैती की वारदात सामने आ रही हैं। 
 

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